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आईबीसी के तहत बढ़ती रियल्टी वसूली से मजबूत हो रहा है उपभोक्ताओं का विश्वास

Torbit - November 07, 2023 - - 0 |

रेरा और आईबीसी जैसे ऐतिहासिक सुधारों के साथ रियल एस्टेट का नियामक परिदृश्य लगातार मजबूत हो रहा है और आईबीसी के तहत बढ़ती वसूली ने रियल एस्टेट उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ाया है। निश्चित रूप से यह फेस्टिव रियल एस्टेट के लिए अच्छा संकेत है।

एनारॉक-खेतान एंड कंपनी की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, आईबीसी के तहत कुल प्राप्तियों में रियल एस्टेट क्षेत्र की हिस्सेदारी 50% से अधिक है। हालाँकि, आईबीबीआई द्वारा डेटा जारी करने के बाद, माननीय एनसीएलएटी के समक्ष अपील की स्वीकृति के बाद एक बड़ा महत्वपूर्ण मामला विचाराधीन हो गया, जिसके परिणामस्वरूप आईबीसी के तहत कुल प्राप्तियों में रियल एस्टेट क्षेत्र का हिस्सा 18.8%  था। यह पूर्व रिपोर्ट में निर्दिष्ट  वित्त वर्ष 2017 में इसकी स्थापना के बाद  से सितंबर 2022 तक, 1.2% की कुल प्राप्तियों के साथ बहुत अच्छी तरह मेल खाता है।

शोभित अग्रवाल, एमडी एवं सीईओ, एनारॉक कैपिटल का कहना है कि दायर किए गए कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी)  के मामलों की कुल संख्या वित्त वर्ष 22 में औसतन 208 से बढ़कर वित्त वर्ष 23 में औसतन 313 हो गई है। हालाँकि, वित्त वर्ष 2024 की शुरुआत कमज़ोर रही है और पहली तिमाही में कुल मिलाकर 238 मामले स्वीकार किए गए। अक्टूबर 2021 और दिसंबर 2022 के बीच प्रत्येक तिमाही में रियल एस्टेट के मामलों का औसत लगभग 18-20 रहा है। हालांकि, मार्च 2023 में इसमें तेजी से उछाल आया और 44 कॉर्पोरेट देनदारों को सीआईआरपी में शामिल किया गया।

सीआईआरपी में दाखिल मामलों की संख्या

सुदीप मलिक,, पार्टनर, खेतान एंड कंपनी कहते हैं, ”पिछली कुछ तिमाहियों में रियल एस्टेट कंपनियों के सीआईआरपी मामलों में वृद्धि हुई है, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि इन मामलों को कितने प्रभावी ढंग से हल किया जाता है। रियल एस्टेट कंपनियों के चल रहे सीआईआरपी मामलों के सकारात्मक नतीजे घर खरीदारों के विश्वास को मजबूत करते हुए रियल एस्टेट सेक्टर को बढ़ावा देने में प्रमुख भूमिका निभाएंगे।”

कुमार सौरभ सिंह, पार्टनर, खेतान एंड कंपनी कहते हैं, “दिवालियापन के समाधान में लंबे समय तक देरी का एक प्रमुख कारण एनसीएलटी में बड़ी संख्या में रिक्तियां हैं। बेंच को मजबूत करने के उद्देश्य से, सरकार ने हाल ही में 21 सदस्यों की नियुक्ति की है, जो बेंच की ताकत को स्वीकृत संख्या 63 के करीब ले जाएगी। इससे दिवालिया कंपनियों के समाधान में होने वाली देरी को कम किये जाने की उम्मीद है। हालाँकि, सरकार के लिए इस गति को जारी रखना और यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि रिक्तियाँ समय पर भरी जाएँ।”

आईबीसी में प्रस्तावित संशोधन

सीआईआरपी प्रक्रिया को और अधिक सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से, कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने आईबीसी में विचार किए जा रहे परिवर्तनों पर टिप्पणियाँ आमंत्रित की हैं। रिपोर्ट में कई प्रमुख बदलावों को शामिल किया गया है जिन पर विचार किया जा रहा है। गौरतलब है कि इनमें आईबीसी इको-सिस्टम को और अधिक कुशल और प्रभावी बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का बढ़ता उपयोग भी शामिल है।

वर्तमान में, एमसीए, निर्णायक प्राधिकरण, आईबीबीआई, सूचना उपयोगिताएँ और सेवा प्रदाता अलग-अलग तकनीकी प्लेटफार्मों पर काम करते हैं और कुमार सौरभ सिंह के अनुसार, अब उन सभी को एक ही मंच पर लाने का प्रस्ताव है जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी, देरी को कम किया जा सकेगा और अधिक प्रभावी निर्णय लेने की सुविधा मिलेगी। भारत की पहली सूचना उपयोगिता, नेशनल ई-गवर्नेंस सर्विसेज लिमिटेड ने एक दिवालियापन मामले प्रबंधन प्रणाली का भी अनावरण किया है जो समयबद्ध तरीके से सभी सीआईआरपी और परिसमापन प्रक्रिया-संबंधी कार्यों को निर्बाध रूप से निष्पादित करने में दिवालियापन पेशेवरों की सहायता करता है।

आशीष अग्रवाल, एसवीपी- रिसर्च एवं इन्वेस्टमेंट-एडवाईजरी, एनारॉक कैपिटल के अनुसार, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा गठित एक समिति ने कंपनी-वार सीआईआरपी के विपरीत रियल एस्टेट कंपनियों के परियोजना-वार सीआईआरपी की सिफारिश की है। इसके अलावा, यह सिफारिश भी की गई है कि सीआईआरपी प्रक्रिया जारी रहने के दौरान आरपी को बिक्री इकाइयों के स्वामित्व और कब्जे को आवंटियों को हस्तांतरित करने में सक्षम बनाने के लिए आवश्यक संशोधन किए जाएं। अंत में इस रिपोर्ट में रियल एस्टेट मामलों सहित सभी मामलों में तेजी लाने के लिए एनसीएलटी में 5 अतिरिक्त फास्ट-ट्रैक बेंच बनाने की सिफारिश भी की गई है।

रिपोर्ट में एमसीए द्वारा प्रस्तावित संशोधनों और एमएचयूए द्वारा सिफारिशों का विवरण दिया गया है, और सीआईआरपी से गुजरने वाली या सीआईआरपी पूरी करने वाली कई रियल एस्टेट कंपनियों के अपडेट्स की जांच भी की गई है। इनमें जेपी इंफ्राटेक, यूनिटेक, सुपरटेक, लवासा कॉर्पोरेशन, आम्रपाली, डीएस कुलकर्णी, थ्री सी होम्स, रेडियस एस्टेट्स और अन्य शामिल हैं।

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